शायरी कंप्लीट:
तेरे हुस्न की क्या तारीफ करूं,
ताज महल भी तेरे आगे फीका है।
मुमताज की मोहब्बत पत्थर में कैद हुई,
मेरी मोहब्बत तो तेरी आँखों में जीता है।
2 लाइन वर्जन - स्टेटस के लिए छोटा:
तेरे हुस्न की क्या तारीफ करूं,
ताज महल भी तेरे आगे फीका है।
शाहजहां ने एक बनाया था दुनिया देखने,
मैंने तो तुझे दिल में बसा रखा है।
एक और वर्जन - Attitude वाला:
तेरे हुस्न की क्या तारीफ करूं,
ताज महल भी तेरे आगे फीका है।
वो तो दुनिया के लिए अजूबा है,
तू तो मेरी दुनिया का अकेला अजूबा है।