“अमा यार सुनो…!
ज़रा ठहरो, सुना तो दो,
जो बात दिल में दबी हुई है,
उसे हवाओं में बहा तो दो।
हमने पंक्तियाँ लिख दी हैं,
अब तुम चाहो तो शोर करो,
चाहे हँसो, चाहे तिलमिलाओ,
जो कुछ करना है — कर लो।
स्याही में थोड़ी आग भी है,
थोड़ा व्यंग, थोड़ा प्यार भी,
कुछ सच की कड़वी खुशबू है,
कुछ मौसम का श्रृंगार भी।
ये शब्द नहीं बस आईना हैं,
चेहरों का हाल बता देंगे,
जो खुद को राजा समझ रहे,
उनको भी ज़मीन दिखा देंगे।
अमा यार सुनो…!
बात अभी बस इतनी सी है —
हमने सच को लिख डाला है,
अब तुमसे जो होता है… कर लो।”