"पापा की वो आखिरी जेब... जिसमें मेरे लिए 10 रुपये और एक टूटा हुआ सपना था"

 मुगलसराय स्टेशन के बाहर आज भी एक बूढ़ा चाय बेचता है। नाम है रामलाल। उम्र 68 साल। चेहरा झुर्रियों से भरा, हाथ कांपते हैं, लेकिन आंखों में एक अजीब सी चमक है। मैं रोज़ उसी से चाय पीता हूं। आज उसने अपनी कहानी सुनाई... और मैं बताता हूं, कलम कांप रही है लिखते-लिखते।


*टूट कर बिखरना अगर देखना हो तो,  

कभी एक बाप की खाली जेब देख लेना।  

वो जो चुपचाप सब सह जाता है,  

उसके दर्द की कोई कीमत नहीं होती।


रामलाल के 3 बच्चे थे। बड़ा बेटा इंजीनियर, मंझला दिल्ली में नौक


री करता था, सबसे छोटी बिटिया रानी। रानी को डॉक्टर बनना था। रामलाल स्टेशन पर कुली का काम करता था। पीठ पर 50 किलो का बोझ, दिन भर में 200-300 रुपये कमाता। पर घर में कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी।


2019 की सर्दी थी। रानी का NEET का एग्जाम था। फीस 1 लाख रुपये। रामलाल के पास सिर्फ 40 हज़ार थे। उसने अपनी पत्नी की आखिरी निशानी - सोने की अंगूठी - गिरवी रख दी। बिटिया से कहा, "तू बस पढ़ाई कर बिटिया, पैसे की चिंता मत कर।"


*बाप की हथेली में छाले इसलिए नहीं पड़ते,  

कि वो मज़दूर है।  

छाले इसलिए पड़ते हैं,  

ताकि बेटी के हाथों में किताब रहे।


रानी ने एग्जाम दिया। रिजल्ट आया - 720 में से 681 नंबर। पूरे मुगलसराय में मिठाई बंटी। रामलाल स्टेशन पर सबको फ्री चाय पिला रहा था। आंखों में आंसू थे, पर होंठों पर हंसी। उसने कहा, "आज मैं राजा हूं।"


पर कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई। एडमिशन के लिए 8 लाख और चाहिए थे। बड़ा बेटा बोला, "पापा, मुझसे उम्मीद मत रखना, मेरी खुद की EMI चल रही है।" मंझले ने फोन उठाना बंद कर दिया।


रामलाल 3 दिन तक सोया नहीं। चौथे दिन उसने अपनी किडनी बेचने का फैसला कर लिया। दलाल से बात भी हो गई - 3 लाख मिल रहे थे।


जब बेटे मुंह मोड़ लेते हैं ना,  

तो बाप अपने जिस्म का सौदा कर लेता है।  

क्योंकि उसकी नज़र में,  

उसकी औलाद की एक मुस्कान, उसकी जान से कीमती है।


जिस दिन ऑपरेशन होना था, उस दिन रानी को पता चल गया। वो भागकर हॉस्पिटल आई, अपने पापा के पैरों में गिर गई। "पापा, मुझे डॉक्टर नहीं बनना। मुझे आप जिंदा चाहिए।"


रामलाल उस दिन बहुत रोया। पहली बार। फूट-फूट कर। उसने किडनी नहीं बेची। रानी ने ड्रॉप ले लिया। 1 साल मेहनत की, ट्यूशन पढ़ाए, और अगले साल सरकारी कॉलेज में फ्री सीट निकाल ली।


आज रानी बनारस में MBBS फाइनल ईयर में है। हर महीने पापा को 5000 भेजती है। बोलती है, "पापा अब आप चाय मत बेचो।" 


पर रामलाल मानता नहीं। कहता है, "बिटिया, जब तक सांस है, मेहनत करूंगा। तेरे भाइयों को भी तो पालना है ना... वो नाराज़ हैं, पर हैं तो मेरे ही खून।"


बाप वो दरख़्त है जो,  

खुद धूप में जलता है,  

ताकि उसकी औलाद छांव में रह सके।  

और हम... उसी दरख़्त की टहनियां काट देते हैं।


मैंने पूछा, "बाबा, कभी गुस्सा नहीं आता बेटों पर?" 

बोले, "बेटा, बाप का दिल कब्र जैसा होता है। सब दफन कर देता है। बस दुआ निकलती है।"


आज भी उसकी जेब में एक पुराना 10 का नोट रखा है। कहता है, "ये वो आखिरी नोट था जो रानी के एडमिशन के बाद बचा था। इसे देखकर हिम्मत आती है।"


दोस्तों, अगर आपके पापा ज़िंदा हैं, तो जाकर उनके पैर छू लेना। फोन कर लेना। वो सिर्फ तुम्हारे 'Hello' के लिए तरसते हैं।


और अगर इस कहानी ने आपका दिल छुआ हो तो...

1. Comment करो - अपने पापा के लिए 2 लाइन लिखो। 2. Share करो - ताकि वो बेटे भी पढ़ लें जो पापा को भूल गए हैं। 3. 10 लोगों को Tag/Add करो - जिनको अपने माता-पिता की कदर करना सिखाना चाहते हो। 

शायद आपका एक Share किसी का घर टूटने से बचा ले। शायद कोई बेटा आज अपने पापा को गले लगा ले।


इंसानियत ज़िंदा रखो। दर्द बांटने से कम होता है।


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