NCERT Class 8 History Book में बड़ा बदलाव: बाबर क्रूर, अकबर और औरंगजेब पर क्या लिखा?

 


NCERT की संशोधित कक्षा 8 की इतिहास पाठ्यपुस्तक इस समय शिक्षा जगत की सबसे बड़ी चर्चा बनी हुई है। यह सिर्फ किताबों के पन्ने बदलने का मामला नहीं है, बल्कि भारत अपने अतीत को अगली पीढ़ी को कैसे पढ़ाएगा, इस पर एक बड़ी बहस है।


आपके लिए यहाँ एक विस्तृत ब्लॉगर पोस्ट तैयार है:


NCERT की नई कक्षा 8 की किताब: इतिहास को 'साफ-सुथरा' नहीं, 'पूरा' दिखाने की कोशिश?


भूमिका:

2025-26 शैक्षणिक सत्र से लागू हुई NCERT की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ने मुगल काल की व्याख्या को नए सिरे से लिखा है। किताब का पहला चैप्टर 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' है और इसमें 13वीं से 17वीं शताब्दी तक के भारत के राजनीतिक मानचित्र पर फोकस किया गया है।


1. आखिर बदला क्या है?


रिपोर्ट्स के अनुसार सबसे बड़े बदलाव भाषा और फ्रेमिंग में हैं:


बाबर: नई किताब में बाबर को 'तुर्क-मंगोल शासक और सैन्य रणनीतिकार' और साथ ही 'क्रूर विजेता' और 'निर्मम आक्रमणकारी' के रूप में वर्णित किया गया है। 

अकबर: पहले जहाँ अकबर को मुख्य रूप से एक सहिष्णु शासक के रूप में पढ़ाया जाता था, अब उसके शासन को 'क्रूरता और सहिष्णुता का मिश्रण' बताया गया है। 

औरंगजेब: उसे एक 'कठोर सैन्य शासक' कहा गया है, जिसने गैर-मुस्लिमों पर जजिया फिर से लगाया, गैर-इस्लामी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया और अपने शासनकाल में मंदिरों और गुरुद्वारों को तोड़ने के आदेश दिए। 


NCERT के पॉलिटिकल साइंस ग्रुप के हेड मिशेल डैनिनो ने इस बदलाव पर कहा था कि इतिहास को साफ-सुथरा दिखाने के बजाय, उसके ब्राइट और डार्क दोनों साइड को सामने लाना जरूरी है।


2. भाषा क्यों हुई अधिक सीधी?


नई किताब धार्मिक फैसलों, सांस्कृतिक योगदान और क्रूरता की नई व्याख्या करती है और धार्मिक असहिष्णुता के उदाहरणों को भी शामिल करती है। 


उद्देश्य स्पष्ट बताया गया है - युद्धों, राजनीतिक फैसलों और नरसंहार जैसी घटनाओं को नरम शब्दों में छिपाने के बजाय तथ्यात्मक और सीधी भाषा में बताना। समर्थकों का तर्क है कि इससे छात्र इतिहास को रोमांटिक कहानी के रूप में नहीं, बल्कि उसके वास्तविक परिणामों के साथ समझेंगे।


3. बहस के दो पहलू


समर्थकों का पक्ष:

उनका मानना है कि छात्रों को इतिहास के कठिन अध्यायों से बचाना नहीं चाहिए। यदि किसी शासक ने जजिया लगाया या खोपड़ियों के टावर बनवाए, तो उसे उसी रूप में बताना तथ्यात्मक ईमानदारी है। यह छात्रों को 'व्हाट्सएप इतिहास' से बचाकर सत्यापित स्रोतों पर आधारित इतिहास पढ़ाता है।


आलोचकों और इतिहासकारों का पक्ष:

इतिहासकारों और शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग चिंतित है। उनका कहना है:

किसी भी 300 साल के साम्राज्य को केवल 2-3 लेबल - 'क्रूर', 'सहिष्णु', 'कठोर' - में समेटना इतिहास का सरलीकरण है।

अकबर की क्रूरता और सहिष्णुता दोनों एक साथ कैसे काम करती थीं? औरंगजेब की आर्थिक और दक्कन नीति का संदर्भ क्या था? इन सवालों के बिना छात्र केवल जजमेंट याद करेंगे, विश्लेषण नहीं सीखेंगे।

क्या 12-13 साल के बच्चों के लिए भाषा इतनी सख्त होनी चाहिए कि वह नफरत पैदा करे?


4. असली सवाल: इतिहास पढ़ाना क्या है?


यही वह बिंदु है जहाँ यह चर्चा क्लासरूम से निकलकर हमारे समाज तक आती है।


क्या इतिहास शिक्षा का मकसद सिर्फ तारीखें, युद्ध और 'कौन अच्छा - कौन बुरा' याद कराना है?


या इसका मकसद छात्रों को यह सिखाना है कि:

किसी ऐतिहासिक दावे का प्रमाण क्या है?

एक ही घटना को दरबारी इतिहासकार, विदेशी यात्री और स्थानीय स्रोत अलग-अलग कैसे देखते हैं?

किसी शासक का फैसला उस समय के राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक संदर्भ में क्यों लिया गया?


बेहतर इतिहास शिक्षा वह है जो दो काम एक साथ करे - सत्यापित तथ्य छिपाए नहीं, और साथ ही छात्र में आलोचनात्मक सोच पैदा करे ताकि वह खुद तय कर सके कि अतीत का वर्तमान से क्या संबंध है।


नई NCERT किताब निश्चित रूप से इतिहास को अधिक स्पष्ट और सीधा बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। अब चुनौती शिक्षकों की है कि वे इस सीधी भाषा को क्लासरूम में बहस, स्रोत-परीक्षण और संदर्भ के साथ कैसे पढ़ाते हैं, ताकि इतिहास एक बंद फैसला न बनकर, एक खुली खोज बने।


आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं - यह जरूरी स्पष्टता है या अति-सरलीकरण?


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